एंग्जायटी (चिंता) क्या है? (What is Anxiety in Hindi)
क्या आपको भी कभी किसी बड़े इवेंट से पहले घबराहट होती हैं, या फिर किसी जॉब इंटरव्यू से पहले मन में अजीबोगरीब ख्याल आने लगते है या फिर किसी एग्जाम से ठीक पहले हथेलियों में पसीना आने लगा है? ऐसी कुछ परिस्थितियो में हमारा दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है। वास्तव में ये किसी बीमारी का संकेत नहीं हैं। क्यूँकि ये सभी अनुभव कुछ देर तक ही महसूस होते है, और बाद में खुद ही दूर हो जाते हैं। लेकिन अगर ये सभी अनुभव आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के और बार-बार होने लगे तो, क्या ये किसी बीमारी का संकेत हो सकता है?
एंग्जायटी क्या है?
एंग्जायटी (चिंता) हमारे शरीर की एक स्वभाविक प्रक्रिया है, जो हमें किसी भी नयी स्थिति, तनाव या असहजता का सामना करने में मदद करती है, जैसे किसी इंटरव्यू में जाने से पहले, या एग्जाम के दौरान या फिर किसी नयी जगह शिफ्ट होते समय। यह आपको किसी भी परिस्थिति का सामने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि, अगर आपको एंग्जायटी के लक्षणो का अनुभव बार-बार आने लगता है, और 6 महीने से अधिक समय तक रहता हैं, जिससे आपकी रोज़मरा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही हैं, तो वो एंग्जायटी डिसऑर्डर (चिंता विकार) का कोई लक्षण हो सकता हैं।
आइए इस लेख में, हम एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है? (Anxiety Disorder kya Hai), एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण (Anxiety Disorder ke Karan), एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of Anxiety Disorder), एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार (Types of Anxiety Disorder in Hindi), एंग्जायटी डिसऑर्डर के इलाज (Treatment of Anxiety Disorder in Hindi) सहित सभी टॉपिक पर चर्चा करते है।
एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या हैं?
ग्जायटी डिसऑर्डर एक मानसिक रोग है। जिसके कारण आपके मन ही मन तनाव, डर, घबराहट और चिंता सताने लगती है, जो बाद में उन चीजों को करने की क्षमता को भी प्रभावित करती है, जो आपको पसंद हो।
एंग्जायटी डिसऑर्डर आपकी शारीरिक (Physical) और भावनात्मक (Emotions) दोनों तरह की स्थितियों में बदलाव लाना शुरू कर देती है। क्यूँकि एक मामूली चिंता भी आपके जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती है, और अगर वह एंग्जायटी डिसऑर्डर का कोई गंभीर लक्षण हो तो फिर उससे आपकी रोजाना की जिंदगी पर भी फर्क पड़ सकता है।
एंग्जायटी डिसऑर्डर हमारी मानसिक सेहत से जुड़ी एक बहुत ही आम समस्या है, जिससे किसी भी उम्र के लोगों के जीवन में परेशानी पैदा हो सकती है।
भारत में किए गए एक रिसर्च के अनुसार, लगभग 45 मिलियन लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं।
एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार?
एंग्जायटी डिसऑर्डर के कई अलग-अलग प्रकार हो सकते हैं। इसके कई प्रकार ऐसे भी हैं, जिसके बारे में हमें जानकारी भी नहीं होती। लेकिन इस एंग्जायटी डिसऑर्डर के कुछ सामान्य प्रकार भी है जिनके बारे में कुछ जानकारी निम्नलिखित है: जैसे
1. एगोराफोबिया (Agoraphobia) – जब हम किसी पब्लिक प्लेस या किसी परिस्थिति का सामना करने से डरते हैं, जहां हमें शर्मिंदा या असहज होने का डर होता है, तो ऐसी स्तिथि को एगोराफोबिया डिसऑर्डर कहते हैं।
2. सामान्यीकृत एंग्जायटी डिसऑर्डर (Generalized anxiety disorder) – इस तरह के डिसऑर्डर में रोजमर्रा के कामों में परेशानी होना या बहुत ज्यादा काम करने, किसी इवेंट में व्यस्त रहने से समस्या आती है। क्यूँकि इसमें आप किसी भी बात को लेकर बहुत ज्यादा सोचना (Overthinking) शुरू कर देते हैं। और यह डिसऑर्डर ज्यादातर एंग्जायटी डिसऑर्डर या डिप्रेशन जैसे कंडीशन के साथ ही होता है।
3. पैनिक डिसऑर्डर – इसमें आपको पैनिक अटैक हो सकता सकता है, यानी कि आपके अंदर एक्यूट एंग्जायटी, डर या भय जैसे हालात उत्पन्न होते है। जैसे जब किसी को हार्ट अटैक आता है, तो उसे सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, दिल जोर जोर से धड़कना या घबराहट होती है। उसी पैनिक के कारण आपको अटैक की चिंता सताने लगती है, कि कही आपको अटैक दोबारा ना आए और फिर आप उन कार्यों को करने से भी बचते है, जो पहले पूरे हो चुके होते है।
4. सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर – यह डिसऑर्डर विशेष रूप से उन बच्चों और किशोरों में सामान्य होता है, जो अपने माता-पिता से अलग होने से डरते हैं। सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण बच्चों में यह डर बैठ जाता है, कि उनके माता-पिता उनसे दुखी होंगे या अपने वादे के अनुसार वापस नहीं आएंगे।
5. सेलेक्टिव मुटिज़्म – इस डिसऑर्डर में, बच्चे कुछ विशेष परिस्थितियों में बात करने से बचते हैं, या फिर उन्हें बात करने में समस्या आती है, जैसे कि स्कूल या किसी अन्य प्लेटफॉर्म में संवाद करने में सक्षम होने के बावजूद भी वह वह बात नहीं कर पाते हैं (जैसे घर पर परिवार के करीबी सदस्यों के साथ)। यह डिसऑर्डर उन बच्चों के लिए स्कूल, वर्क प्लेस और विभिन्न पब्लिक इवेंट में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
6. सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर – इस तरह की स्थिति में, आप अपमान होने के डर से, किसी बात पर शर्म महसूस करने या कोई अन्य व्यक्ति आपके बारे में क्या सोचता है, जैसे चीजों को लेकर लोगों के साथ मिलने या बात करने से बचते हैं।
7. सब्सटांस इनड्यूस्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर – इसमें नशीली दवाओं के दुरुपयोग, ड्रग्स के इस्तेमाल, या फिर किसी टॉक्सिक पदार्थ के संपर्क में आने या ड्रग विथड्रॉल सिम्प्टम के कारण एक्यूट एंग्जायटी या पैनिक अटैक हो सकता है।8. फोबिया – इसमें आपके अंदर किसी एक विशेष स्थिति या वस्तु के प्रति मन में एक डर बैठ जाता है। जिससे कुछ लोग अपने इस फोबिया के कारण पैनिक अटैक का अनुभव करते हैं।
एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण?
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है, कि एंग्जायटी डिसऑर्डर कारण क्या है। क्यूँकि एंग्जायटी डिसऑर्डर आपके जीवन की कुछ अनचाही या तनावपूर्ण घटनाओं के कारण होता हैं। अगर आपके परिवार में कोई एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित है, तो आप भी इससे पीड़ित हो सकते हैं।
लेकिन आपको कुछ अंडरलाइंग मेडिकल अंतर्निहित चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता हैं, जिनसे आप अनजान हैं: जैसे
- दिल (हार्ट) की बीमारी
- डायबिटीज
- हाइपरथयरॉइडिस्म (ओवरएक्टिव थायराइड फंक्शन/ Hyperthyroidism)
- साँस की समस्या
- इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (बड़ी इंटेस्टाइन को प्रभावित करने वाली बीमारी जिसके परिणामस्वरूप पेट में परेशानी होती है)
- कभी-कभार होने वाली बीमारियां जो आपके शरीर में हार्मोन लेवल को बदल सकती हैं।
एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण क्या हैं?
जब एंग्जायटी डिसऑर्डर की बात आती है, तो इस बीमारी के लिए कोई सामान्य लक्षण नहीं होते हैं। क्यूँकि इस बीमारी से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति का एक अलग ही अनुभव होता है। लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण भी है, जो ज्यादातर व्यक्ति अनुभव करते हैं: जैसे
- बहुत ज्यादा तनाव महसूस करना।
- आसन्न खतरे की भावना प्राप्त करना।
- हार्ट रेट (ह्रदय गति) में बढ़ोतरी।
- तेजी से सांस लेना, पसीना आना और कंपकंपी।
- थकान।
- ध्यान केंद्रित करने और सोने में समस्या होना।
- पेट में बेचैनी।
एंग्जायटी डिसऑर्डर के ज्यादातर मामलों में एक साथ कई तरह के लक्षण सामने आते हैं, जिन्हें “एंग्जायटी अटैक” के रूप में जाना जाता है।
एंग्जायटी अटैक क्या है?
एंग्जायटी अटैक कोई मानसिक समस्या नहीं है। क्यूँकि यह एक व्यक्ति के अंदर बेचैनी, चिंता, दुःख या पैनिक की स्थिति उत्पन्न करता है। कई लोगों के अंदर एंग्जायटी अटैक को विकसित होने में अधिक समय लग सकता है। लेकिन जब कोई तनावपूर्ण स्थिति उस व्यक्ति के सामने आती है, तो यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
एंग्जायटी अटैक विभिन्न तरीके से विकसित हो सकता हैं। क्यूँकि हर व्यक्ति का इस अटैक का अनुभव अलग अलग हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि एंग्जायटी के कई प्रकार के लक्षण हैं, जो हर किसी को प्रभावित नहीं करते, और समय के साथ बदलते रहते हैं। एंग्जाइटी अटैक का अनुभव करते समय आप निम्नलिखित समस्यायें महसूस कर सकते हैं: जैसे
- सुन्न होना, चक्कर आना और बेचैनी
- पसीना आना
- सांस लेने में कठिनाई होना
- मुंह सूखना
- उदास रहना
- अचानक ठंड लगना या चेहरे और सीने पर गर्मी महसूस होना (हॉट फ्लैशेज)
एंग्जायटी अटैक का सामना करने के लिए कुछ ऐसी तकनीक भी है, जो आपको इससे राहत प्रदान कर सकती हैं। जैसे गहरी साँस लेना, आरामदायक व शांत म्यूजिक सुनना, 1 से 100 तक की गिनती करना, किसी सुरक्षित स्थान की कल्पना करना या फिर अपने किसी दोस्त/परिवार के सदस्य से बात करना आदि।
एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान कैसे किया जाता है?
एंग्जायटी डिसऑर्डर के निदान के लिए ऐसी कोई निश्चित तकनीक नहीं है, जिससे इसका निरक्षण किया जा सकता हो। इसलिए आपकी एंग्जायटी के स्पष्ट कारणों को पता करने के लिए निम्नलिखित टेस्ट किये जाते हैं: जैसे
मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Test) – यह टेस्ट आपके विचारों, भावनाओं और व्यवहार के बारे में जाने के लिये आवश्यकता होता है, ताकि किसी अन्य समस्या की शंकाओं को दूर किया जा सके। एंग्जायटी डिसऑर्डर अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ भी हो सकता हैं, जैसे कि डिप्रेशन या मादक पदार्थों का सेवन, जिससे एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण को पता लगाना और मुश्किल हो जाता है।
सामान्य शारीरिक परीक्षण (General physical examination) – जब आप डॉक्टर के पास
अपना शारीरिक परीक्षण करवाने जाते हैं, तो आपका डॉक्टर आपको फिजिकल टेस्ट कर सकता है। यही अक्सर एंग्जायटी डिसऑर्डर का प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है, जिसका परीक्षण इस टेस्ट के माध्यम से किया जा सकता है।
लैब टेस्ट (Lab Test) – अगर आपकी एंग्जायटी का कारण कोई मेडिकल कंडीशन है, तो इसके लिए आपका डॉक्टर आपको कुछ ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट जैसे लैब टेस्ट करवाने की भी सलाह दे सकता है।
एंग्जायटी डिसऑर्डर का उपचार क्या है?
एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए साइकोथेरेपी (टॉक थेरेपी) और दवाएं दो मुख्य उपचार विकल्प हैं। हालाँकि, ऐसा जरुरी नहीं है, कि हर व्यक्ति को अपनी एंग्जायटी का इलाज करवाने के लिए दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। आपका डॉक्टर आपको इनमें से किसी भी विकल्प का सुझाव दे सकता है, या आपके इलाज के लिए दोनों विकल्पों को भी आजमा सकता है।
1. साइकोथेरेपी – इसे टॉक थेरेपी या काउंसलिंग के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर के मूल कारण को जानने के लिए आपकी एक थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करवाई जाती है।
एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (Cognitive behavioural therapy/CBT) सबसे प्रभावी साइकोथेरेपी का रूप है। CBT एक शॉर्ट टर्म ट्रीटमेंट है, जो आपके एंग्जायटी के लक्षणो को कम करने के लिए एक विशेष तरह की स्ट्रेटेजी पर काम करता है। जिससे आप उन एक्टिविटी को दोबारा शुरू कर पाते हैं, जो आप एंग्जायटी के कारण नहीं कर रहे थे।
CBT एक तरह से एक्सपोज़र ट्रीटमेंट है, जिसमे आपका उन उन वस्तुओं या परिस्थियों से सामना करवाया जाता जिनसे आपको एंग्जायटी होती है। इससे आप अपने आत्म-विश्वास को वापिस अपने अंदर हासिल करने में सफल हो सकते हैं।
2. दवाएं – आपका डॉक्टर आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर के मानसिक या शारीरिक कारणो के आधार पर कुछ दवाएं लिख सकता है। यदि आपकी चिंता किसी भी दवा के कारण है, जो आप ले रहे हैं, तो आपका डॉक्टर या तो उस दवा को बंद कर सकता है, या फिर आपकी उस चिंता को दूर करने के लिये एक उपयुक्त विकल्प बता सकता है।
आम तौर पर, आपका डॉक्टर आपके लिए निम्नलिखित दवाएं निर्धारित कर सकता है: जैसे
- एंटीडिप्रेसेंट (डिप्रेशन के साथ-साथ एंग्जायटी का इलाज करने वाली दवाएं)।
- एंटी-एंग्जायटी दवाएं।
- अन्य दवाएं, जो एंग्जायटी के लक्षणो से तत्काल राहत देने के लिए उपयोग की जाती हैं।
3. एंग्जायटी डिसऑर्डर के घरेलू उपचार- एंग्जायटी डिसऑर्डर का उपचार घर पर करने की सलाह नहीं दी जाती है। हालांकि, कुछ ऐसे घरेलु तरीके भी है, जो आपकी एंग्जायटी के लक्षणो को कम कर सकते हैं। जैसे:
- अच्छी नींद लेना – आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद बहुत ही जरुरी होती है। क्यूँकि अच्छी और पर्याप्त नींद लेने से आपके शरीर को आराम और ठीक से स्वस्थ होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करना – अपने शरीर को एक्टिव और फिट रखने से मानसिक और शारीरिक समस्या नहीं आती है। और इसकी शुरुआत आप सामान्य फिजिकल एक्सरसाइज से कर सकते और बाद में अपनी क्षमता के अनुसार अपनी एक्टिविटी को बढ़ा सकते हैं, जिससे आपको ज्यादा तकलीफ नहीं होती।
- शराब और धूम्रपान से दूर रहें – शराब या रिक्रेशनल दवाओं जैसे पदार्थ या तो आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर का कारण बन सकते हैं, या फिर इन्हें ओर गंभीर कर सकते हैं। क्यूँकि इनका आपके शरीर पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता हैं। यदि आप इन आदतों को छोड़ना चाहते हैं, तो आप रिहैबिलिटेशन सेंटर में भी एडमिट हो सकते हैं।
- कॉफी का सेवन कम करें – कॉफी और कोल्ड ड्रिंक जैसे कैफीनयुक्त ड्रिंक में कैफीन मौजूद होता है। यह केमिकल आपके मेटाबोलिज्म में बाधा डालता है, जो आपकी नींद में भी बाधा डालता है। हालांकि आप एक दिन में एक कप कॉफी पी सकते लेकिन वही अगर आपको दिन में कई बार कॉफी पीने की आदत है, तो वो आपकी सोने की आदतों में बाधा डाल सकती है, और आपकी चिंता को बढ़ा सकती है।
- हेल्दी फूड को प्राथमिकता दें – स्टडी से पता चलता है, कि एंग्जायटी आपके शरीर में एंटीऑक्सिडेंट (पदार्थ जो कोशिकाओं को ठीक करता है, या क्षति को रोकते है।) के लेवल को कम कर देती है। इसलिए ब्रोकली, पालक, गाजर और आलू जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियां खाने से आपको आपकी चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
मैडिटेशन करें – तनाव और चिंता अक्सर एक साथ आते हैं। कई बार एंग्जायटी डिसऑर्डर अक्सर किसी तनावपूर्ण घटना या स्थिति से पहले ही हो जाता हैं। आप अपने एंग्जायटी डिसऑर्डर को प्रबंधित करने के लिए ध्यान, योग, विज़ुअलाइज़ेशन तकनीक (खुद को खुश या सुरक्षित वातावरण में कल्पना करना) आदि जैसी कई आराम दिलाने वाली तकनीक आजमाने की भी कोशिश कर सकते हैं।
एंग्जायटी डिसऑर्डर को कैसे रोकें?
कोई भी यह नहीं बता सकता है, कि आपके अंदर एंग्जायटी डिसऑर्डर कब और कैसे विकसित हो सकता हैं।
इसलिए, एंग्जायटी डिसऑर्डर को रोकने के लिए कोई निश्चित तरीका नहीं है। लेकिन अपने लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ घरेलू उपचारो की मदद से आप अपनी एंग्जायटी को कम कर सकते हैं। इसके अलावा जब आपको लगे कि एंग्जायटी आपकी रोज़मरा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रही है, तो आप किसी डॉक्टर से भी कंसल्ट कर सकते हैं। आप अपने ट्रीटमेंट में जितनी देरी करेंगे, इसका प्रभावी तरीक़े से इलाज करना उतना ही कठिन होता जाएगा।
डिप्रेशन और एंग्जायटी में क्या अंतर होता है? क्या ये एक दूसरे से संबंधित हैं?
कुछ लोगों को डिप्रेशन और एंग्जायटी एक सामान ही लगते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां हैं। पर इनके लक्षण एक जैसे भी हो सकते हैं। हालांकि, ये दोनों बताने में एक जैसे ही लगते हैं, लकिन फिर भी इनमे थोड़ा बहुत अंतर है। जैसे
डिप्रेशन मानसिक स्वास्थ्य बीमारियों का एक समूह है, जो आपके मन को उदास और चिंतित रखता है। कभी-कभी उदास होना स्वाभाविक है, लेकिन बार-बार एक जैसा अनुभव होना समस्या उत्पन्न कर सकता है। दूसरी ओर एंग्जायटी डिसऑर्डर को अक्सर अत्यधिक घबराहट के रूप में माना जाता है, जो आपके नियमित जीवन को बाधित कर सकता है।
एंग्जायटी डिसऑर्डर में अंडरलाइंग क्लीनिकल या मेजर डिप्रेशन (हर समय मन उदास रहना) के लक्षण होते हैं, जिनके परिणामस्वरूप क्लीनिकल डिप्रेशन ओर भी गंभीर हो सकता है।
यदि आपको किसी भी प्रकार की एंग्जायटी दो सप्ताह से ज़्यादा रहती है, तो आप तुरंत ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एंग्जायटी का शुरूआती ट्रीटमेंट ही एंग्जायटी डिसऑर्डर को मैनेज करने और उसके फ्यूचर लक्षणों को पहचानने का सबसे कारगर तरीका है। हालाँकि, आपके लिए सबसे उपयुक्त ट्रीटमेंट की पहचान करने समय लग सकता है। इसके अलावा, आपको
अपने लिए सबसे उपयुक्त ट्रीटमेंट को चुनने से पहले विभिन्न तरह उपचार के विकल्पों को भी आज़माना चाहिए।


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