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ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ के लक्षण, कारण, इलाज

ब्रेस्ट (स्तन) के अंगों के अंदरूनी भाग के अनियंत्रित रूप से विकसित होने से ब्रेस्ट में गांठ (Breast Lump) की समस्या उत्पन्न होती है। ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ होना काफी चिंता और भयावह है। आंकड़ों के अनुसार 10 में से 8 ऐसे मामले जिसमें ब्रेस्ट की गांठ कैंसर से जुड़ी हुई पाई जाती है। 

महिलाएं खुद से जांच कर भी ब्रेस्ट में गांठ (Breast Lump Meaning in Hindi) के बारे में पता लगा सकती है या फिर चिकित्सक से भी ब्रेस्ट के गांठ के बारे में आसानी से पता लगा सकते हैं। स्तन में गांठ को वार्षिक तौर पर मैमोग्राफी टेस्ट से भी पता लगा सकते हैं। आइए ब्रेस्ट में गांठ (Breast Lump Meaning in Hindi) के बारे में विस्तार से इसके प्रकार, लक्षण, निदान, इलाज के बारे में समझते हैं। 

ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ के प्रकार (Types of Breast Lump in Hindi)

तो आइये हम सबसे पहले ब्रेस्ट में गांठ (Breast Lump Meaning in Hindi) के प्रकार के बारे में समझते हैं।  आमतौर पर ब्रेस्ट (स्तन) गांठ (Breast Lump) चार प्रकार के होते हैं

1. फाइब्रोएडिनोमा (Fibroadenoma)अक्सर युवा महिलाओं में होने की संभावना होती है, यह कैंसर से जुड़ी हुई नहीं होती है।

2. ब्रेस्ट सिस्ट (Breast cysts) मुलायम द्रव से भरी थैली होती है।

3. फाइब्रोसिस्टिक मासेस द्रव का संयोजन है।

4. ब्रेस्ट कैंसर आमतौर पर स्तन के गांठ दर्द रहित और स्तन के अंगों में कड़ापन महसूस होता है।

ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ के लक्षण (Breast Lump Symptoms in Hindi)

अभी तक हमनें ब्रैस्ट लम्प (Breast Lump Meaning in Hindi) के  प्रकार के बारे में पढ़ा है। अब इसके लक्षण को समझते हैं। इसके सिम्पटम्स  को समझना बहुत जरुरी है। शुरुआती स्तर में नीचे दिए गए तरीके से ब्रेस्ट में गांठ के बारे में पता कर सकते है।

1. ब्रेस्ट के अंगों को छूकर कड़ापन महसूस होने से ब्रेस्ट के गांठ का पता लगा सकते हैं 

2. ब्रेस्ट के गांठ से ब्रेस्ट के अंगों में होने वाले बदलाव से भी ब्रेस्ट के गांठ का पता लगा सकते हैं।

3. ब्रेस्ट के अंग की त्वचा के लाल होने से भी ब्रेस्ट के गांठ का पता लगा सकते हैं। 

4. ब्रेस्ट के निप्पल से द्रव का रिसाव होने से भी ब्रेस्ट में गांठ की संभावना होती है।

ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ के मुख्य लक्षण 

ब्रेस्ट में गांठ (Breast Lump Meaning in Hindi) आमतौर पर कैंसर से जुड़ी हुई नहीं होती है। लेकिन यदि नीचे दिए गए लक्षणों का अनुभव हो तब, डॉक्टर से ब्रेस्ट के गांठ से जुड़ी समस्या को लेकर अवगत हो सकते हैं। 

1. यदि ब्रेस्ट में दर्दरहित गांठ का अनुभव हो।

2. ब्रेस्ट का अन्य भाग ब्रेस्ट के गांठ का भाग में चिकनाहट हो।

3. यदि मासिक चक्र के बाद ब्रेस्ट के गांठ की अनुभूति हो।

4. यदि ब्रेस्ट के गांठ में बदलाव और ब्रेस्ट के गांठ में वृद्धि प्रतीत हो।

5. यदि ब्रेस्ट के गांठ के कारण ब्रेस्ट लाल रंग की दिखाई दे।

ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ के कारण (Breast lump causes in hindi)

नीचे दिए हुए कारणों से भी ब्रेस्ट के गांठ के जोखिम हो सकती है।

उम्र में वृद्धि – उम्र में वृद्धि होने के साथ ही ब्रेस्ट के गांठ होने की जोखिम काफी ज्यादा होती है। 

ब्रेस्ट के गांठ का पारिवारिक इतिहास – यदि परिवार में कोई ब्रेस्ट के गांठ की समस्या से जुड़े हुए हों, इससे भी ब्रेस्ट के गांठ की जोखिम की संभावना काफी ज्यादा होती है। 

सक्रिय नहीं रहना – महिलाएं जो सक्रिय नहीं रह पाती उन्हें ब्रेस्ट गांठ की समस्या काफी ज्यादा होती है। 

वजन में अत्यधिक वृद्धि – व्यस्क या वृद्ध महिला जिन्हें अत्यधिक वजन हो उनमें ब्रेस्ट के गांठ की संभावना ज्यादा होती है।

हार्मोन्स का सेवन करना – कुछ प्रकार के हार्मोन्स के सेवन करने से भी ब्रेस्ट के गांठ की जोखिम की समस्या में वृद्धि होती है।

शराब का सेवन – शराब के अत्यधिक सेवन से भी महिलाओं में ब्रेस्ट के गांठ की जोखिम संभावना काफी ज्यादा होती है। 

ब्रेस्ट में गांठ से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय

विभिन्न रिसर्च के अनुसार जीवनशैली में बदलाव से ब्रेस्ट के गांठ की समस्या उत्पन्न होती है। नीचे बताए गए उपाय से ब्रेस्ट गांठ की समस्या को कम कर सकते हैं।

शराब – शराब के सेवन से ब्रेस्ट गांठ की संभावना काफी अधिक होती है। सामान्य आंकड़ों के अनुसार शराब के सेवन से ब्रेस्ट में गांठ की समस्या काफी ज्यादा होती है।

शरीर के वजन में अत्यधिक वृद्धि – वजन में अत्यधिक वृद्धि से भी ब्रेस्ट के गांठ की समस्या उत्पन्न होती है। डॉक्टर से उचित स्वास्थ्य रणनीति लेकर भी वजन को संतुलित कर स्वास्थ्य रह कर ब्रेस्ट के गांठ की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

एक्टिव रहना – घर के विभिन्न काम-काज से जुड़कर या फिर सक्रिय रह कर अपने वजन को संतुलित रहकर भी ब्रेस्ट के गांठ से छुटकारा पा सकते हैं। 

स्तन-पान – स्तन-पान भी ब्रेस्ट के गांठ से बचाव के लिए एक बेहतर विकल्प है। स्तन-पान की अवधि जितनी अधिक होती है, उससे उतनी ही ब्रेस्ट के गांठ से बचाव मिलती है।

ब्रेस्ट गांठ के जोखिम से बचने के लिए सही खान-पान (Diet for Breast lump in hindi)

सही खान-पान से भी ब्रेस्ट के गांठ के जोखिम से बचने में मदद मिलती है। नीचे खान-पान की सूची दी गई है जिससे आप सही पौष्टिक आहार के बारे में जान सकते हैं 

1.पत्तेदार हरी सब्जियां – नीचे कुछ पत्तीदार सब्जियों को सूची दी गई है 

1. सरसों का साग 

2. पालक

3. गोभी 

4. आर्गुला

हरी पत्तेदार सब्जियों में आंटोऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिससे ब्रेस्ट गांठ की संभावना काफी काफी कम हो जाती है। 

2. कुरकुरी सब्जियां – पत्तागोभी, फूलगोभी के सेवन से भी ब्रेस्ट के गांठ की संभावना काफी कम हो जाती है। 

3. एलियम सब्जियां – एलियम सब्जियां में लहसुन और प्याज आते हैं। इन सब्जियों में एंटीकैंसर के गुण मौजूद होते हैं। इन सभी सब्जियों में एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी होती है। 

4. खट्टे फल – खट्टे फल जैसे संतरे, पके फल, नींबू इत्यादि। खट्टे फलों और उनके छिलके ऐसे योगिकों से भरे होते हैं जो ब्रेस्ट में गांठ के जोखिम को कम करते हैं। खट्टे फलों में विटामिन C, बीटा कैरोटिन, कैरिटोनाइड आदि पाए जाते हैं। इन सभी फलों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीकैंसर पाए जाते हैं। 

5. जामुन – नियमित रूप से जामुन खाने से भी ब्रेस्ट गांठ की संभावना काफी कम हो जाती है। 

ब्रेस्ट में गांठ एक भयावह समस्या हो सकती है लेकिन यह निश्चित रूप से आपके आहार से प्रभावित होती है।

ब्रेस्ट में गांठ के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines for Breast lump meaning in Hindi)

कई आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार स्वास्थ्य खान-पान से भी ब्रेस्ट के गांठ की समस्या को कम कर सकते हैं, जिससे अन्य बीमारी जैसे, मधुमेह, हृदय की समस्या और स्ट्रोक के खतरे से भी राहत मिलती है। 

अपने वजन को संतुलित रखना भी ब्रेस्ट गांठ से बचाव में एक अहम भूमिका निभाता है।

ब्रेस्ट में गांठ को कैसे पहचाना जाए (How to diagnose Breast Lump in Hindi

अधिकतर ब्रेस्ट में गांठ (Breast lump in hindi) कैंसर रहित होते है, ब्रेस्ट गांठ कैंसर से रहित है या नहीं इसके लिए चिकित्सक उचित जांच करने की सलाह देते हैं, नीचे दिए हुए एक या उससे ज्यादा जांच करने की सलाह देते है। 

1.मैमोग्राफी – मैमोग्राफी जांच में एक्स-रे के निम्न स्तर का उपयोग करके ब्रेस्ट में गांठ का उपयोग किया जाता है। 

2.अल्ट्रासाउंड – ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड में साउंड वेव्स का उपयोग कर ब्रेस्ट की तस्वीर को दिखाया जाता है। ब्रेस्ट मैमोग्राफी में ब्रेस्ट के गांठ की तस्वीर संग्रहित की जाती है जिसे मामोग्राफी में साफ नहीं दिखाई देती है। 

3. ब्रेस्ट MRI – ब्रेस्ट MRI में शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र, रेडियो फ्रीक्वेंसी पल्स और कंप्यूटर का उपयोग करके ब्रेस्ट के गांठ का उपयोग किया जाता है। MRI, मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड की तुलना में ब्रेस्ट के गांठ की अवलोकन करने में काफी उपयोगी होती है। 

यदि इन सभी जांच से पता लग जाता है की ब्रेस्ट गांठ कैंसर- रहित है तब आगे ब्रेस्ट के गांठ के लिए कोई जांच की आवश्यकता की नहीं होती है। लेकिन डॉक्टर भविष्य में ब्रेस्ट के गांठ में बदलाव, वृद्धि की जांच कर सकते हैं। 

यदि इन सभी जांच से पता नहीं लगता की ब्रेस्ट कैंसररहित है या नहीं, आगे जांच और सही अवलोकन के लिए बायोप्सी की आवश्यकता होती है। इसके लिए नीचे दिए हुए तस्वीर-निर्देशित जांच की मदद ली जाती है। 

1.अल्ट्रासाउंड निर्देशित बायोप्सी – इस प्रकार के बायोप्सी में अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का प्रयोग करके ब्रेस्ट के गांठ का पता लगाया जाता है, रेडियोलॉजिस्ट एनेस्थीसिया का उपयोग कर पतली सूई से ब्रेस्ट के गांठ के छोटे हिस्से को माइक्रोस्कोप को मदद से जांच करते है। बायोप्सी की प्रकिया काफी जल्द होती है लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग जाते हैं 

2. स्टीरियोटैक बायोप्सी – इस प्रकार के बायोप्सी में डिजिटल मैमोग्राफी एक्सरे मशीन का उपयोग करके ब्रेस्ट के गांठ का पता लगाया जाता है, रेडियोलॉजिस्ट एनेस्थीसिया का उपयोग करके पतली सूई से गांठ का अत्यंत छोटा टुकड़ा लेकर उसकी जांच करते हैं। 
3. MRI निर्देशित बायोप्सी – इस प्रकार की बायोप्सी में एक MRI मशीन का उपयोग करके ब्रेस्ट के गांठ की जांच करते है, रेडियोलॉजिस्ट एनेस्थीसिया का उपयोग करके पतली सूई से ब्रेस्ट के गांठ के टुकड़े की जांच करते है।

ब्रेस्ट में गांठ का उपचार (Treatment Breast lump meaning in hindi)

चिकित्सक ब्रेस्ट के गांठ से जुड़ी समस्या का उपचार करने से पहले ब्रेस्ट के गांठ का प्रकार की जांच कर एक उचित  चिकित्सा की योजना बनाते हैं। सभी ब्रेस्ट के गांठ को लेकर कोई उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। 

ब्रेस्ट संक्रमण होने पर चिकित्सक उचित एंटीबायोटिक्स से जांच करने करने की सलाह देते हैं। ब्रेस्ट सिस्ट होने पर आमतौर पर कोई उपचार की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि सिस्ट समय के साथ खुद ही गायब हो जाते हैं।

यदि ब्रेस्ट का गांठ कैंसर से जुड़ी हुई समय हो तब नीचे दिए हुए चिकित्सा का उपयोग किया जाता है।

1. लंपेक्टमी (Lumpectomy) –  इस प्रकार की चिकित्सा में ब्रेस्ट के गांठ को ब्रेस्ट के अंगों से ऑपरेशन द्वारा अलग किया जाता है।

2. मास्टेक्टमी (Mastectomy) – इस प्रकार की चिकित्सा में ब्रेस्ट के गांठ के सफल रूप से ऑपरेशन द्वारा ब्रेस्ट के अंगों से अलग किया जाता है।

3. केमेथेरेपी (Chemotherapy) – इस प्रकार की चिकित्सा में विभिन्न प्रकार की दवाई का उपयोग करके कैंसर से जुड़ी गांठ का इलाज किया जाता है।

4. रेडिएशन (Radiation) – इस प्रकार के तरीकों में रेडियोएक्टिव किरणों का उपयोग करके कैंसर से जुड़े गांठों का इलाज किया जाता है। 

चिकित्सक की ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी चिकित्सा ब्रेस्ट गांठ के कैंसर के आकार, स्थान और यह ब्रेस्ट के अन्य भागों में कितना फैला है, उस अनुसार जांच किया जाता है।

ब्रेस्ट में गांठ से जुड़े भ्रम और तथ्य  (Myhts vs facts about  Breast Lumps in Hindi)

जरूरी ज्ञान के अभाव के कारण ब्रेस्ट के गांठ की समस्या को लेकर महिलाओं की स्थिति काफी भयावह और भ्रमित करती है। 

ब्रेस्ट में गांठ से जुड़े भ्रम और तथ्य नीचे दिए हुए हैं। 

ब्रेस्ट में गांठ से कैंसर की संभावना – महिलाओं में ब्रेस्ट के गांठ से जुड़े 10 में से 8 मामले कैंसर से जुड़े नहीं होते हैं। यह आमतौर पर सिस्ट और फाइब्रोएडोनोम हो सकता है। कई गांठ महिलाओं के मासिक चक्र के बाद गायब हो जाती है।

यदि ब्रेस्ट में गांठ की समस्या हो और लेकिन मैमोग्राफ सामान्य हो – इस स्थिति में अन्य कई जांच की आवश्यकता होती है जैसेकी MRI Ultrasound की जांच की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही बायोप्सी की भी जरूरत होती है जिसमें चिकित्सक गांठ का अत्यंत छोटा टुकड़ा लेकर उसकी जांच करते हैं।

कैंसर से जुड़े ब्रेस्ट के गांठ अक्सर दर्दरहित होते हैं –  यह आवश्यक नहीं है की ब्रेस्ट गांठ जो कैंसर से जुड़े हो वह दर्दरहित हो। 

यदि आप स्तन-पान के दौरान गांठ का अनुभव हो – यदि स्तन-पान के दौरान गांठ का अनुभव हो तब इसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए। 
युवा अवस्था में ब्रेस्ट में गांठ अक्सर कैंसररहित होते हैं – युवा अवस्था में ब्रेस्ट के गांठ का होने पर भी यह कैंसर की समस्या हो सकती है जिसके लिए चिकित्सक की उचित जांच की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष

ब्रैस्ट में गाँठ (Breast Lump Meaning in Hindi) के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो इसके लिए Hexa Health से परामर्श लेकर ब्रेस्ट के गांठ (Breast Lump in Hindi)) की सही जानकारी के बारे में पता लगा सकते हैं और उचित चिकित्सा की मदद से ब्रेस्ट के गांठ से निदान पा सकते हैं।

Frequently Aksed Questions: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

1. छाती में गांठ हो जाए तो क्या करना चाहिए?

आमतौर पर छाती में गाँठ का निदान करने के लिए मेमोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिए। इसके पश्चात सही इलाज के लिए जाना चाहिए। 

2. गांठ की जांच कब करवानी चाहिए?

जब छाती में गाँठ या उभार जैसे अनुभव हो या छाती से द्रव जैसी कोई पदार्थ निकलता है तो आपको डॉक्टर से उचित सलाह लेने की जरुरत पड़ती है।  

3. ब्रेस्ट (स्तन) में गांठ कितने प्रकार की होती है?

आमतौर पर ब्रैस्ट में 4 प्रकार के गाँठ होते हैं। जो इस प्रकार है:  फाइब्रोएडिनोमा (Fibroadenoma) ब्रेस्ट सिस्ट (Breast cysts)फाइब्रोसिस्टिक मासेसब्रेस्ट कैंसर  

4. आपको कैसे पता चलेगा कि स्तन की गांठ कैंसर है?

अगर आपके निप्पल के आकार में बदलाव होना, निप्पल से दूध के अलावा लिक्विड डिस्चार्ज होना, स्तनों में दर्द सूजन या लाल होना जैसे प्रारंभिक लक्षण है। 

5. ब्रेस्ट कैंसर के 5 चेतावनी संकेत क्या हैं?

ब्रेस्ट कैंसर के 5 शुरूआती लक्षण इस प्रकार हैं:

  1. स्तन के आकर में बदलाव होना। 
  2. स्तन में सूजन या उभार आना। 
  3. निप्पल से लिक्विड निकलना। 
  4. स्तन या अंडर आर्म्स में नयी गाँठ बनना। 
  5. मीनोपॉज देर से होने के कारण भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। 

6. ब्रेस्ट में गांठ होने से क्या दर्द होता है?

 गाँठ होने पर मामूली दर्द या दर्द नहीं भी हो सकता है। लेकिन इसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। 

7. छाती में गांठ क्यों बनती है?

आमूमन स्तन में गाँठ हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। 

8. गांठ की दवा कौन सी है?

आमतौर पर छाती के सभी गाँठों के लिए दवा की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन अगर संक्रमण के कारण गांठ है तो डॉक्टर कुछ एंटी-बायोटिक दवा की सलाह देते है। 

9. क्या एक खींची हुई छाती की मांसपेशी एक गांठ का कारण बन सकती है?

अगर छाती की मांशपेशियों में खिंचाव के कारण दर्द या सूजन होता तो आपको शीघ्र  डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। 

10. ब्रेस्ट कैंसर कितने दिन में फैलता है?

ब्रेस्ट कैंसर 

11. क्या MRI से ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है?

जी हाँ, एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल ब्रैस्ट कैंसर का समय से पहले पता लगाने के लिए किया जाता है। 

12. ब्रेस्ट कैंसर में कौन सी जांच की जाती है?

20 से 25  वर्ष की लड़कियों को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है। जबकि 40 वर्ष से अधिक की महिलाओं के लिए मेमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। 


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